कल्पनापूरा संग्रह

रचना 179 / 789

बंद पलकों में ....मखमली एहसास जगा दूं

बंद पलकों में ....मखमली एहसास जगा दूं यादों का दरख़्त ........इश्क़ के पत्ते उगा दूं कायम कर दूं ,ला.....बहार का मौसम कुछ पुराने खत ,आ...... तुझको पढ़ा दूं रूकने न दूं इश्क ......उम्र की देहलीज़ पर संग गुज़रे लम्हे ........कालीन से बिछा दूं

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह