वो एक ऐसी खिड़की है जिसमें नित नए दरवाज़े उगते रहते हैं।
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वो एक ऐसी खिड़की है जिसमें नित नए दरवाज़े उगते रहते हैं। रोज़ पिछला दरवाज़ा तोड़ कर मैं नए दरवाज़े पर एक दस्तक टांग देती हूँ। दरवाज़े खत्म नहीं होते खिड़की भी बंद नहीं होती। कारीगरी उसकी ख़ास है तो ज़िद्द मेरी भी कम काबिले गौर नहीं । दुआ में रहें हम दोनों मुबारक रहें। दिन शुभ रहे। 💕
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह