कल्पनापूरा संग्रह

रचना 183 / 789

तुम्हें जीतना थोड़े ही था

तुम्हें जीतना थोड़े ही था... मुझे हारने का मन था तुमसे बस तुमसे बस तुमसे का अर्थ समझते हो? सब में से तुमको । तुमको का अर्थ समझते हो? तुम में से भी तुम्हारे तू को तू का अर्थ समझते हो? तू माने वो जो किसी ने न देखा हो मेरे सिवा अलबेला सा ... पर निष्ठुर मेरे मन का बहेलिया प्रेम से दुःख का और दुःख से प्रेम का आखेट करने वाला। मैं श्रेष्ठ ही लूंगी । मेरी प्रतिक्षा में घुन नहीं लगेगा।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह