कल्पनापूरा संग्रह

रचना 192 / 789

पहली और अब वाली कल्पना में अपार अंतर है ।अब ईश्वर से कम कुछ…

पहली और अब वाली कल्पना में अपार अंतर है ।अब ईश्वर से कम कुछ लेती नहीं मैं। मुझे पसंद है एकांत का एक और एक का एकांत

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह