कल्पनापूरा संग्रह

रचना 201 / 789

जैसा मैंने सोचा

जैसा मैंने सोचा... जैसा मैंने चाहा... जैसा मैंने कहा... जैसा मैंने किया... वो सब एक सा है और रहेगा सदा..... बस तुम्हारे लिए मेरे प्रेम पर परत चढ़ती है ... कोई वर्क नहीं चढ़ता। 💕 यू रखिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह