कल्पनापूरा संग्रह

रचना 204 / 789

कितने दिन लगेंगे भुलाने में

कितने दिन लगेंगे भुलाने में ... मुझे बताना फिर आज़माउंगी खुद को💐 तुम पर मेरी व्यथा उधार है और मुझ पर मेरा मन *संडे वर्किंग है आज ।स्कूल में स्वच्छता श्रम दान है। वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी है। तस्वीर बस अभी कार में ली है। कुछ मस्ती कुछ श्रम करके आती हूं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह