कल्पनापूरा संग्रह

रचना 203 / 789

हम क्या ही दे सकते हैं एक दूसरे को

हम क्या ही दे सकते हैं एक दूसरे को... तुमसे मिलकर बस खत्म होना है..... कहना है.... इति कल्पना

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह