कल्पनापूरा संग्रह

रचना 206 / 789

ज़िन्दगी कभी भी लौटने की जगह थी ही नहीं..... वो हमेशा से शुर…

ज़िन्दगी कभी भी लौटने की जगह थी ही नहीं..... वो हमेशा से शुरू की जाने वाली रही है। एक ज़िन्दगी में कई starting point होते हैं .... इसलिए लोग पीछे छूटते जाते हैं....ज़िन्दगी अगली राह ....अगली बांह पकड़ती रहती है। Love u ज़िन्दगी....😊 शुभरात

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह