कल्पनापूरा संग्रह

रचना 208 / 789

मन वो समुंदर है जो अपने पानी से गीला नहीं होता ।उसे चाहिए ह…

मन वो समुंदर है जो अपने पानी से गीला नहीं होता ।उसे चाहिए होती है बारिश की एक बूंद ... कुछ छींटे नदी के ... भीग जाने के लिए। तुम्हारा मुझमें इतना ही होना बहुत से अधिक है। मेरे खारेपन में तुम्हारा इतना ही खरा पन काफ़ी है तर बतर हो जाने के लिए। कुछ बूंद कुछ छींटे

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह