कल्पनापूरा संग्रह

रचना 211 / 789

हमारे पास दो जीवन हैं और ये दूसरा शुरू ही उस पल होता है जब…

हमारे पास दो जीवन हैं और ये दूसरा शुरू ही उस पल होता है जब हम ये पहचान लेते हैं कि हमारे पास एक ही तो जिंदगी बची है जीने के लिए। वो जो जी भर जीना है वही दूसरा जीना है .....जीने के बाद वाला जीना सीखो ।उसे गले लगाओ। बस उसके हो जाओ। वो करो जो जीने को पुख्ता रखे।

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