कल्पनापूरा संग्रह

रचना 225 / 789

दोनों के हाथ कुछ नहीं लगा

दोनों के हाथ कुछ नहीं लगा... उसने एक शख्स खो दिया जो हमेशा उसकी ज़िद्द में था। और उसने वो स्त्री खो दी जिसका हृदय टूटने से पहले सोने का था। शून्य को किसी तरफ भी लुढ़का दो ....वो प्रेमी के बगल में ही बैठा दिखेगा ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह