कल्पनापूरा संग्रह

रचना 232 / 789

काश साइबेरियन पक्षी होता प्रेम

काश साइबेरियन पक्षी होता प्रेम .... लौटना सिखाना न पड़ता इंतज़ार दोनों तरफ का खुद ढो लेता। चोंच में दबाए रहता रिक्तता ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह