अब तुम को देखती हूं तो लगता है जाने क्यूं तुम्हारे लिए उड़ा…
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अब तुम को देखती हूं तो लगता है जाने क्यूं तुम्हारे लिए उड़ान भरी होगी दिल ने? उल्टी दिशा को बहने वाली धारा थी मैं। विलय से उद्गम को जाने वाली। मुझको नीला समुंदर कैसे मिलता और क्यूं मिलता। मुझे हरे पहाड़ों से मिल जाना था। वहीं रूह हो जाना था।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह