कल्पनापूरा संग्रह

रचना 234 / 789

देह और मन को तराजू पर रखो तो मन हल्का ही होता है ।

देह और मन को तराजू पर रखो तो मन हल्का ही होता है । याद रहे.... उसको हल्के में ना लेना। देह तो एक पल को बैठ भी जाए.... चट से। मन बिठाने में ज़माने लगते हैं। और बहुत सारा आत्म सम्मान

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