कल्पनापूरा संग्रह

रचना 247 / 789

कुछ नदी का खारापन रखना था और कुछ समुंदर के मोड़

कुछ नदी का खारापन रखना था और कुछ समुंदर के मोड़ तुम मिल रहे हो ना प्रेम ?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह