कल्पनापूरा संग्रह

रचना 272 / 789

लगभग 30साल पहले हमारे पांडेखोला में भी रामलीला होती थी। घर…

लगभग 30साल पहले हमारे पांडेखोला में भी रामलीला होती थी। घर के सभी लोग पाठ खेलते थे। स्वर्गीय हेमू काका ने रावण , उमेश दद्दा ने जनक,सुमंत और जटायू, विनोद ने गौरी और सीता,पिताजी ने केवट, जीवनकक्का ने बाणासुर ,विनीत ने शत्रुघ्न का, दीपू ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न और हर्षु ने सीता और शत्रुघ्न का पाठ खेला है। आज घर में दिवाली की पुताई चल रही तो पुश्तैनी खजाना निकला। विनोद और विनीत दोनों ही पुरानी बातें बताने लगे । यादें हैं ....पुरानी हैं पर इनको फेंका नहीं जा सकता। याद के तीन चार बक्से हर साल सूखते हैं और फिर बंद हो जाते हैं । धरोहर हैं ...श्रद्धा का कोई मोल नहीं होता। विनोद हर पात्र के कपड़े पहन कर बचपन को चूम रहे। ये फीलिंग वही महसूस कर सकते हैं मैं तो बस लिख सकती हूं । लिख दी। हर मन में ईश्वर बना रहे। आप सब को दशहरा की शुभकामनाएं

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह