कल्पनापूरा संग्रह

रचना 273 / 789

तुम पर ग़ज़ल लिखना क्या मुश्किल है चाँद

तुम पर ग़ज़ल लिखना क्या मुश्किल है चाँद? एक मिसरा तुम मेरी अर्ज़ उठा लो एक मिसरा मैं तुम्हारी बेरुखी का तोड़ लेती हूँ

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह