कभी सोचती हूँ तो लगता है लौटाने के लिए मेरे पास तुम्हारी कु…
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कभी सोचती हूँ तो लगता है लौटाने के लिए मेरे पास तुम्हारी कुछ पल भर आवाज़ और एक नज़र भर के अलावा है ही क्या.... इतने भर से तुम रोज़ रोज़ कितना सारा हो जाते हो मेरे पास। होने के लिए होना वैसे भी जरूरी रखा ही नहीं। हम चेहरे carve करने में माहिर लोग हैं। दुःख और एकांत में बार बार बन जाने वाला चेहरा ही आपका प्रेम है। अगर कोई आपको फ़िक्र में रखता है तो आपको यकीनन उस रूह को मान देना ही चाहिए। दुआ देनी ही चाहिए ।एक पल वक़्त देना ही चाहिए। फ़िक्र इस जहान की सबसे बड़ी नेमत है।आप अगर किसी की प्रार्थना के दायरे में आते हो तो उसे गले लगाना ही चाहिए। प्रेम लौटाने का कौन सा वक़्त कभी मुक़र्रर हुआ है? कहो अभी... कि इंतज़ार बिछड़ने के बाद ही शुरू होता है। और बिछड़ना कभी तय शुदा नहीं होता।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह