कल्पनापूरा संग्रह

रचना 279 / 789

चाहना के हिस्से आयी हताशा को रेखाओं और अक्षरों का आलिगंन मिला

चाहना के हिस्से आयी हताशा को रेखाओं और अक्षरों का आलिगंन मिला.... लाओ...... उदास कविता की उष्मा लिख दूँ । कई रातें रोक कर कविता रचता है कोई ..... एक रात रोक कर कविताएं रचते हैं कई..... Writing is healing . 😊😊😊😊

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