कल्पनापूरा संग्रह

रचना 283 / 789

तुम्हारा दिया एकांत मेरा प्रिय फूल है।

*तुम्हारा दिया एकांत मेरा प्रिय फूल है। महकता रहता है। शुक्रिया

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह