कल्पनापूरा संग्रह

रचना 284 / 789

तुम्हारा मुझमें कितना सारा होना इस बात से तय करता है कि मे…

तुम्हारा मुझमें कितना सारा होना इस बात से तय करता है कि मेरी उंगलियां तुम्हें लिख तो सकती हैं ... पर तुम्हें मिटा नहीं पाती। तुम जरूरी हो उनके लिए .... जैसे ईश्वर मेरे लिए। मैं भी उसे मिटा नहीं पाती।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह