कल्पनापूरा संग्रह

रचना 285 / 789

पतवार के घाव किसको लगते हैं

पतवार के घाव किसको लगते हैं ..... पानी को बहाव को नैय्या को खेवैया को या छोर को ? शायद सबके हिस्से थोड़े थोड़े .... प्रेम में प्रेमी भी वही थोड़ा थोड़ा हैं। लोग हमारी कहानियां पढ़ते ही इसलिए हैं क्योंकि वो एकांत खोजते हैं अपने लिए और एक विकल्प भी ताकि मौन हो सकें। बहुत सारा कौन हो सकें। लिखना शिफ़ा है ... शौक था कभी।

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