कल्पनापूरा संग्रह

रचना 286 / 789

उसने कहा आज शरद पूर्णिमा है .... चांद देखना।

उसने कहा आज शरद पूर्णिमा है .... चांद देखना। मैंने कहा चांद टप गिरता मेरी झोली में तो कहती मिठास मिली .... खीर तो वैसे भी मीठी हो ही जाती है प्रेम में । कटोरी भर खुद को बचा कर रखूंगी ... तुम पड़ना मुझमें रात भर ।

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