कल्पनापूरा संग्रह

रचना 299 / 789

Bhavya Pandey

Bhavya Pandey पहाड़ी जनमबार पुए के बिना पूरा नहीं होता। सुबह तो स्कूल भागने की जल्दी थी । शाम को मेरी मां का फोन आया कि पुए बनाए ? मैंने कहा अभी बना ही रही। आप सब को भी चखा देती हूं। दुआ दीजिए कि बिटिया के पंखों में हौसला भरा रहे। आप सब की शुभकामनाओं का शुक्रिया।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह