अगर पास एक ही सुख है
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अगर पास एक ही सुख है .... तो वो तुम हो और अगर एक ही दुःख है... तो वो भी तुम हो। इन दोनों पंक्तियों में सिर्फ़ प्रेम है और सारा सिर्फ़ मेरा है। कुछ प्रेम दिखते नहीं .... पर होते हैं। सब्र का यह एक कंकड़ उसका दिया हुआ है जिसे डाल कर मैं कब नदी से झील हो गयी मुझे खुद पता नहीं चला। अब शांत हूँ।भंवर अब भी उठते हैं पर धीरे धीरे किनारे लग जाते हैं। हम प्रेम में कुछ कहे बिना भी कितना कुछ कहते हैं ..... प्रेम सुना जाना चाहिए चुपचाप। 😊
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह