कल्पनापूरा संग्रह

रचना 305 / 789

एक तेरा साथ

एक तेरा साथ... आज गमले में प्रेमी खिले हैं। हम तुम कुछ और बंधेंगे।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह