कल्पनापूरा संग्रह

रचना 308 / 789

तुम्हें तलाशने ,पाने और खोने के फेर में मुझसे ईश्वर खर्च हो…

तुम्हें तलाशने ,पाने और खोने के फेर में मुझसे ईश्वर खर्च हो जाता है। तुम मुझे प्रार्थना विधिवत सिखाते हो। प्रेम तुम मेरा ईश्वर लौटा देते हो । बस इस लिए आस्था के मेरे सारे फूल तुम्हारी देहरी में खिलते,बिछते, मुरझाते हैं। मेरे मन में दो ईश आंख मूंदे स्थापित रहते हैं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह