कल्पनापूरा संग्रह

रचना 310 / 789

ये बात कितनी जादुई है कि तुम्हारे लिए आस थक जाती है पर प्रय…

ये बात कितनी जादुई है कि तुम्हारे लिए आस थक जाती है पर प्रयास नहीं थकते। इतना सारा कितना सारा हो तुम । तुमसे सना कमल हूं। तैरता हुआ । मेरी डूब दिखेगी नहीं। मैं ब्रह्म हूं तुझमें ।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह