कल्पनापूरा संग्रह

रचना 324 / 789

घर आबाद रहे। तस्वीरें कल शाम की हैं। मेरा संयुक्त परिवार ह…

घर आबाद रहे। तस्वीरें कल शाम की हैं। मेरा संयुक्त परिवार है। आज तक हम सबका सांझा चूल्हा है। इस बात पर हमें गर्व है। ऐसा सदा रहे। अल्मोड़ा का घर हम सबके लिए मंदिर सा है। सदा रहे। उमेश दद्दा का परिवार और मेरठ जीवन कक्का का परिवार इस बार साथ नहीं थे। अगली बार सब फिर मिलेंगे होली में।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह