कल्पनापूरा संग्रह

रचना 325 / 789

मां.... रोशनी खुद रोशन होते हुए दिखना क्या खूब बात है।

मां.... रोशनी खुद रोशन होते हुए दिखना क्या खूब बात है। बनी रहना मुझमें।

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