कल्पनापूरा संग्रह

रचना 326 / 789

इतनी बड़ी दुनिया में तुम पर मन आया। क्या बड़ी बात है ।

इतनी बड़ी दुनिया में तुम पर मन आया। क्या बड़ी बात है । मन आते ही दुनिया छोटी हो गई । ये बड़ी बात है। दुनिया छोटी होते ही अब बस तुम हो। मन है ......बहुत सारा ये सबसे गज़ब बात है। प्रेम अविरल धारा है उगती,जुड़ती,मुड़ती, टूटती वहीं से है जहां दो मन हो। बस ये मन बनाए रखो।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह