कल्पनापूरा संग्रह

रचना 327 / 789

ये प्रेम - वेम कुछ नहीं होता

ये प्रेम - वेम कुछ नहीं होता ... बस ज़िन्दगी हर रोज़ थोड़ी और कम्बख्त होती रहनी चाहिए। आज पुराना लुक तज दिया ।कुछ नया करते रहना चाहिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह