कल्पनापूरा संग्रह

रचना 334 / 789

जितना हिस्सा खो चुका

जितना हिस्सा खो चुका जितना अभी पाया जाना शेष है वह बस प्रेम है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह