जितना हिस्सा खो चुका जितना अभी पाया जाना शेष है वह बस प्रेम है।
रचना 334 / 7898 मार्च 2024जितना हिस्सा खो चुका✣जितना हिस्सा खो चुका जितना अभी पाया जाना शेष है वह बस प्रेम है।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह