दो ही पत्थर बड़े थे मन और जुबां पर रख लिए नदी बहती रही ।
रचना 342 / 78913 मई 2024दो ही पत्थर बड़े थे✣दो ही पत्थर बड़े थे मन और जुबां पर रख लिए नदी बहती रही ।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह