कल्पनापूरा संग्रह

रचना 343 / 789

अपार प्रेम तो फिर भी पा लोगे

अपार प्रेम तो फिर भी पा लोगे अगाध आंखें कहां से लाओगे?

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह