कल्पनापूरा संग्रह

रचना 366 / 789

मिलोगे तो इससे ज्यादा क्या कहूंगी

मिलोगे तो इससे ज्यादा क्या कहूंगी आओ कत्थई हो जाएं। उसकी आंखों में देखने का सुख हर हार, हर कमी ,हर दुख को मिटा देता है। ये जादुई है पर ये कह सकती हूं कि तुम्हारी आंखों पर मेरा नाम लिखा है ।मैं वहां बनती बिगड़ती रहती हूं।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह