कल्पनापूरा संग्रह

रचना 365 / 789

इंतज़ार बुरा नहीं है

इंतज़ार बुरा नहीं है इस इंतज़ार में आप कितना चटकते हैं वो मारक है। मुस्कान ही तो है... रख लीजिए। मैं और उगा लूंगी।

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