कल्पनापूरा संग्रह

रचना 370 / 789

मेरी मुस्कान का बीज हो तुम

मेरी मुस्कान का बीज हो तुम हरियल हूं अभी बस तुमसे। *असली शक्ल ये है l इसलिए दिल, फूल पत्ती ,वाह ,खूबसूरत जैसा सोच समझ कर लिखा करें। कृपया धोखा न खाएं *कल्पना* वैसे भी ठगती है बहुत। तस्वीर अभी सुबह की है ।मुस्कान रोज़ वाली है।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह