कल्पनापूरा संग्रह

रचना 372 / 789

घर जहां हम *कुछ* से *सब कुछ* पा जाते हैं।

घर जहां हम *कुछ* से *सब कुछ* पा जाते हैं। आज की छुट्टी फेर बदल में गुज़ार दी। थक गई पर मन अच्छा हो गया।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह