कल्पनापूरा संग्रह

रचना 381 / 789

तुम्हें दिल रखने का हक़ तो दूंगी पर दिल तोड़ने की सहूलियत अ…

तुम्हें दिल रखने का हक़ तो दूंगी पर दिल तोड़ने की सहूलियत अपने पास रखूंगी। *चालीस दिन की छुट्टियां यूं चुटकी में बीत गईं । दो दिन बाद स्कूल खुलने वाले। कड़ी धूप इंतजार कर रही। ले ले कल्पना दो दिन और मज़े ले ले। मुस्कान बस अभी सरताज के गीत को सुनकर आई है।

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