कल्पनापूरा संग्रह

रचना 380 / 789

ताला जड़ता ही नहीं

ताला जड़ता ही नहीं उस बंद दरवाजे पर मन प्रेम की विवशता प्रेम से कहीं ज्यादा अराध्य है मेरे लिए।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह