कल्पनापूरा संग्रह

रचना 379 / 789

जिस खूबी से ज़िंदगी हमारी तरफ पत्थर उछालती है उसकी दुगनी शि…

जिस खूबी से ज़िंदगी हमारी तरफ पत्थर उछालती है उसकी दुगनी शिद्दत से पत्थर वापस फैंका जाना चाहिए । उसे भी तो लगे कोई जिगरा जी रहा उस तरफ बेलौस Daddyji ने सिखाया है मैंने बस लिखा है।

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