कल्पनापूरा संग्रह

रचना 387 / 789

हम दोनों के बीच खामोशी का पुल है।

हम दोनों के बीच खामोशी का पुल है। उसे कहना पसंद नहीं ...मुझे बताना । वो आवाज़ नहीं देता ...मैं नाम नहीं लेती। खामोश और खामोशी की जोड़ी अच्छी है ना? शुभरात।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह