तुझ संग बैर लगाया।
तुझ संग बैर लगाया। चैप्टर १ भ्यास नैना प्रिय तुम, सब पहाड़ नहीं होते.... तुम जैसे। बरसों से आंख बंद कर जब भी बैठी ....लगा हम आपस में मिलने वाले हैं। किसी से मिलने की इतनी आतुरता इतनी व्याकुलता पहले कभी नहीं हुई। जाने क्या सुख पाऊंगी ? जाने क्या विकलता खत्म होगी? मिलने के बारे में अक्सर मैंने सुना था कि यह सुख लाता है। सारी बेचैनियों को शांत कर देता है। एक आग पानी पा जाती है। बहुत सारी दूरी पाट दी जाती है। बहुत सारी नजदीकियां नाप दी जाती हैं। खामोशियां ध्वनियां और आस आगोश हो जाते हैं। दिल दो दो बार एक बार में धड़कता है।आंखें एक बार में सौ बार मिलती हैं। देह हरारत पाती है और हथेलियां चैन । मिलना हंसी और आंसुओं की अदला बदली लाता है। होश और नादानियों की फेहरिस्त लंबी हो जाती है। उदासी और विरानियों की फसल कट जाती है। हम मिलकर *काफ़ी* हो जाते हैं। बेशुमार लुत्फ की शाम है मिलना। हैं ना? एक लंबी नज़्म ... एक हैरान करने वाली कहानी एक चुप्पी का अंत। मिलना हमें ईश्वर की तरफ ले जाता है थोड़ा सा और। पर.. ऐसा मिलना तभी होता है जब दो प्यारे लोग एक जैसी vibrations में हो। एक high vibration में और एक low vibration में हो तो मिलना नहीं झेलना होता है। आप चाह कर भी किसी दूसरे को lower vibrations से हाथ देकर अपनी तरफ खींच नहीं सकते। Soul purpose पूरा हुआ नहीं ...अभी Divine time दूर है। मेरे हिस्से में मिलना न आया।पहाड़ न आए पर लोग आए। बहुत सारे लोग। मिलना कभी मेरे पहाड़ । पहाड़ जैसे लोगों से उकता गई हूं। मिलने सा सुख नहीं .....मिलने का सुख देंगे। आना कभी। तुम्हारी नैना। नैना पहाड़ों को जिस भी रात ऐसा ख़त लिखती उस रोज़ ख़्वाब में उन्हीं से बातें करती हुई मिलती। ईजा -ओ ईजा मुझे पकड़ ले।मैं गिर रही। ईजा मुझे हाथ दे। मैं घुरी जाऊँगी।ईजा ओ ईजा -- नैना के दोनों हाथ हवा में थे।ऊनींदी आँखों में बड़े से फ़्रेम का चश्मा था और छाती पर एक मोटी सी किताब - ईजा घबराकर रसोई से भागती हुई आई और चिल्लाई -हे भगवान इस लड़की को जाने किसका छल लगा है ?कितनी बार कहा है छाती पर किताब रख कर नहीं सोते ।पता नहीं क्या क्या पढ़ती रहती है?इस बार गर्मियों में गाँव में जागर लगेगा तो झड़वाऊँगी इसको। उठ रे !छुट्टी है तो सोती रहेगी क्या?कितना काम पड़ा है। ईजा का हाथ अपने हाथ में आते ही नैना झट उठ कर बैठ गयी। माँ के गले लग गयी। उसके गोरे से चेहरे पर नीले फ़्रेम का चश्मा ख़ूबसूरत लग रहा था ।हड़बड़ा के उठी तो कुर्ते के ऊपर के दो बटन खुल गए।लम्बे घुँघराले बालों का जूड़ा बनाते हुए बोली -ईजा ये कोई भूत भात नहीं है ।ये मेरा विज़न है।मुझे आज फिर वही सपना आया ।मैं पहाड़ों पर उड़ रही हूँ । हीयूं गिर रहा ।ये सफ़ेद हरे पहाड़ मुझे बाँह पसारे बुला रहे थे-नैना आ जाओ। नैना आ जाओ। ले पानी पी ले।तेरा दिमाग़ ख़राब हो गया है। सपने भी चश्मा लगा कर देखती है।साफ़ दिखता है क्या नींद में भी?सुन नहा धो कर बंटी के दादाजी से विभूत लगवा ले।शनिवार भी है। कुछ ठीक लगेगा। पता नहीं क्या झसझसाट होता रहता है इसको -माँ ने पानी का गिलास थमाया और रसोई से लाकर तीन बार राई से उसकी नज़र उतार कर चूल्हे में जला दी। ओह्हो ईजा क्या तुम भी।मुझको किसकी नज़र लगने वाली है ?chill रहा कर। ईजा ने पानी का गिलास मेज़ पर रखा और नैना को गुस्साई आँखों से देखते हुए कहा -ये ऊपर के बटन बंद कर। बड़ी हो गयी है।अपने बदन का भी होश नहीं रहता तुझे।और ये इतना बड़ा चश्मा क्यूँ लगाए रखती है ज़रा अच्छा नहीं लगता। कोई भलोभल बर मिल जाता तो ब्याह कर देती तेरा-माँ बिस्तर से चादर समेटती जा रही थी और बड़बड़ाती जा रही थी।कत्तई भयास लड़की है मेरी ।जब देखो पहाड़ पर उड़ती गिरती रहती है ।कब आएगा तेरे को शऊर ? आएगा ईजा आएगा-नैना आँख मटकाकर बोली। कौन आएगा? ईजा ने थोड़ा हाथ रोककर आश्चर्य से पूछा आएगा आएगा आएगा आने वाला आएगा नैना माँ के गलबहियाँ डाल कर गाने लगी। हट परे-ईजा ने झिडक कर कहा । तुम अदरक की चाय चढ़ाओ मैं कमरा समेट कर आती हूँ।ईज़ा कल स्कूल से लौट ते हुए marie बिस्कुट के पैकेट लायी थी तेरे लिए।देखना पर्स में होंगे। निकाल लो प्लीज़-नैना ने बिस्तर झाड़ते हुए कहा। ईज़ा ने नैना को फिर आँख भर देखा --पता नहीं ग़ुस्सा था या प्यार। माँ कमरे को आधा अधूरा छोड़ कर आ गयी।अस्त व्यस्त कमरा हो या नायिका ख़ूबसूरत तो लगते ही हैं।इस वक़्त नैना का कमरा भी यही कहानी कह रहा था।हर चीज़ तरतीब से रखी हो तो जगह बनी रहती है और ख़ाली सी एक वजह भी।नैना के इस अस्त व्यस्त कमरे में हर चीज़ को पसरने की आज़ादी थी ।कोई प्रश्न नहीं।कोई दरकार नहीं।सबकुछ लेज़ी लेज़ी लम्हे में पड़ा हुआ।नैना को अपनी हर चीज़ पहुँच में चाहिए थी और कुछ चीज़ें तो बिलकुल ही क़रीब ।किताबें,क़लम ,वो मोरपंख,दीवार पर लगा पिनिंग बोर्ड और चीनी मिट्टी का कप जिस पर पहाड़ों की तस्वीर छपी थी ।कप की दूसरी तरफ़ लिखा था - wait for me !I am coming . ये customised cup नैना के स्कूल के बच्चों ने उसे पिछले जन्मदिन पर दिया था।बच्चे भी जानते थे नैना मैडम का इश्क़ वाला लव। नीले पिनिंग बोर्ड पर पीली -पीली पर्चियाँ अटकी हुई थी जिन पर कुछ कुछ लिखा हुआ था।पास जाकर देखने पर ही आप अंदाज़ा लगा सकते थे कि उन पर कुछ लिखा हुआ है वर्ना दूर से देखने पर तो लगता नीले आकाश में कई पीली चिड़ियाँ रुकी हुई हैं।उसके ठीक नीचे लिखा था - love you नैना -The girl with midas touch सामने की दीवार पर पिनिंग बोर्ड के अलावा किताबें रखने के लिए एक छोटा सा स्टैंड सटा पड़ा था ।क़रीब दो तीन सौ क़रीने से लगी किताबों की छोटी सी लाइब्रेरी ।नैना ने RV की किताबें सारी एक साथ लगा रखी थी।special soul gets special attention।वहीं बग़ल में लकड़ी की छोटी सी मेज़ थी जिसपर रखीं सारी चीज़ें नैना की अनगढ़ personality को मैच करती थी -vibrant,specific ,simple yet thoughtful मेज़ पर रखी चीज़ें बोलती सी लगती थीं -for नैना by नैना कमरे में नैना की vibrations गूँजती थी।एक energy महसूस होती थी ।इस vibration को अगर कोई देख पाता था तो वह था पीछे की पूरी दीवार पर लगा wallpaper Any guesses ? अगर नहीं समझ पाए नैना को तो चीनी मिट्टी का टेबल पर रखा वह कप एक बार याद करिए।अब दीवार पर नज़र डालिए ।पूरी दीवार पर हिमालय की तस्वीर वाला वॉल्पेपर ।शायद बिनसर से क़ैद की गयी होगी ये तस्वीर। जापानी कहावत है -एक तस्वीर के आगे हज़ार शब्द फीके। कोई पहली बार कमरे में आएगा तो उसे लगेगा कि उत्तराखंड के होटल का कोई कमरा है।हर चीज़ पहाड़ी ।हर हिस्से में पहाड़।हम अपनी चाहनाओं को तस्वीर बना कर ही पूरा कर पाते हैं।कुछ पाने के लिए उसको आँखों के पास नहीं आँखों में रखना होता है। सोते जागते वही नाम लो तो लगता है एक रोज़ सब हमारे मन का होगा।law of attraction works but you have to keep asking and healing yourself every day . जो न हो वो भी होता हुआ देखना प्रेम है....ख़ालिस प्रेम नैना प्रेम में थी इन पहाड़ों के ।उसको लगता था कि दीवार के इस हिस्से में उसका प्रेमी या उसका कोई क़रीबी रहता है जिसे उसने देखा नहीं पर सोचा है ।हद पागलपन सा चाहा है महसूस किया है।वो अक्सर स्कूल से आकर ग़ज़लें सुनती थी। जब बहुत उदास होती तो दोनों बाहें पसार कर वॉल पेपर से लिपट जाती।उसकी उदासी से भी मिश्री ही झरती थी ।वो मिठास बिखेरती जाती।गाती रहती देर तक-तुम मेरे पास होते हो कोई दूसरा नहीं होता ।वो घंटों तक इन पहाड़ों से बतिया सकती थी ।घंटों ख़ामोशी में गुज़ार देने का हुनर पहाड़ों से सीख चुकी थी। रोज़ डायरी में लिखती-रुके रहना प्रिय !आ रही मैं ! She practicised manifestation for mountains .उसे भरोसा था अपनी शिद्दत पर। नैना नहाकर आयी तो ऐसा लगा वॉल पेपर से बर्फ़ का एक फाहा उसके चेहरे पर उतार गया है।उसके नैन नक़्श ठीक ठाक थे।आप उसे Raw beauty कहकर उसकी सुंदरता पर चेक का निशान लगा सकते थे।उसके सारे दोस्त कहते पहाड़न क़हर है ।जाने किस पर गिरेगा।वह तस्वीर में ही नहीं असल में भी धुंध भरे आसमान का पहाड़ी बादल लगती थी ।ठेठ पर मनोरम ।बुरांश जानते हैं? एक पहाड़ी लाल फूल जिसके रस को पिया जाता है ।नैना बुरांश सी थी ।उसमें मद और मस्ती दोनों ही भर भर के मौजूद थे।पहाड़ अपने साथ एक लम्बी ख़ामोशी लिए खड़े रहते हैं।अपने अंदर एक पूरी नदी को समेटे हुए।उनका अंत नहीं मिलता ।आवाज़ भी दो तो चुप रहते हैं पर अकेला नहीं होने देते।लौटाते हैं आवाज़ ।echo -यह शब्द नैना को perfectly define करता था ।नैना भी आवाज़ देने पर ही चहकती बोलती वर्ना ख़ुद में एक बेलोस पर शांत कोसी नदी सरीखी थी। चैप्टर २ इजा की किच किच.... To be continued