कल्पनापूरा संग्रह

रचना 401 / 789

औरत.... औ....और भी ढ़ेर

औरत.... औ....और भी ढ़ेर र......रवायतें लाद दो त....तय कर लूँगी

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह