कल्पनापूरा संग्रह

रचना 409 / 789

अगर व्यर्थ लोग अधिक हैं आसपास तो फूल बनकर नहीं कंटक बन कर अ…

अगर व्यर्थ लोग अधिक हैं आसपास तो फूल बनकर नहीं कंटक बन कर अलग हो जाना श्रेयस्कर है। अमूमन फूल नोच लेते हैं लोग कांटे नोचने के लिए जिगरा चाहिए होता है। मन के दरवाजा हैं अंदर बाहर दोनों तरफ खुलने और बंद करने वाले रखें। इसमें गज़ब सुख है। स्थिर रहना होगा। एक अकेला भी कभी नहीं थकता अगर मन उड़ान भरता रहे।

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