कल्पनापूरा संग्रह

रचना 410 / 789

कोई किसी के बिना नहीं मरता

कोई किसी के बिना नहीं मरता... हां जी अमूमन जाते हैं लोग स्मृतियों के ताबूत पर कील ही ठुके जरूरी तो नहीं... कुछ एक पल भी ठुके होते हैं जीते जीते मर जाने वाले मरते मरते जी जाने वाले

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह