जब सखियां कल्पना को सर पर बिठा लें
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जब सखियां कल्पना को सर पर बिठा लें..... कितना स्पेशल फील करवा दिया। दीपू ने कविता पढ़ी। रंजीता ने किताब पर अपने लिए लिखवाया।सखियों ने थामे रखा। पढ़कर मुस्कुराई। पुरानी खुशी फिर नई हो गई। किताब चाहे अभी पहली ही है पर प्यार भरपूर पाती हूं मैं। लिखना मुझे लिवा ले जाता है तुम तक ।
मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह