कल्पनापूरा संग्रह

रचना 416 / 789

हमें आकार लेना कभी नहीं आया

हमें आकार लेना कभी नहीं आया शून्य जैसा भी नहीं। हम पसर गए काली सफ़ेद चौसर पर।

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह