हमें आकार लेना कभी नहीं आया शून्य जैसा भी नहीं। हम पसर गए काली सफ़ेद चौसर पर।
रचना 416 / 78910 जुलाई 2024हमें आकार लेना कभी नहीं आया✣हमें आकार लेना कभी नहीं आया शून्य जैसा भी नहीं। हम पसर गए काली सफ़ेद चौसर पर।मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह