कल्पनापूरा संग्रह

रचना 415 / 789

जब मैं अपने लिए इतनी आसान हूं तो तुम्हारे लिए कैसे बोझिल हो…

जब मैं अपने लिए इतनी आसान हूं तो तुम्हारे लिए कैसे बोझिल हो सकती हूं? हम दो आबाद लोग हैं निर्झर निश्चिंत निश्चल

मूल प्रकाशनKalpana Pandey का Facebook संग्रह